You would not have seen a war between Rupee and Dollar, now something will happen which has never.

रुपए और डॉलर के बीच जबरदस्त तरीके से जंग शुरू हो गई है. इस जंग में दोनों ओर से प्रहार हो रहे हैं. जब मंगलवार को रुपए में गिरावट देखने को मिली और बुधवार सुबह के सत्र में जिस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे थे. ऐसा लग रहा था कि रुपया डॉलर के सामने लगातार दूसरे दिन टूटता हुआ दिखाई देगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. शाम होते-होते रुपए ने जोरदार वापसी की और डॉलर के मुकाबले में रुपया तेजी के साथ बंद होता हुआ दिखाई दिया. जानकारों की मानें विदेशी निवेशकों के निवेश की वजह से रुपए में तेजी देखने को मिली है. जानकारों की मानें तो डॉलर और रुपए के बीच में वित्त वर्ष के अंत यानी मार्च एंड तक इसी तरह की रस्साकशी देखने को मिलेगी.

जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में रुपए को सपोर्ट करने वाले कई फैक्टर काम करेंगे. जिसकी वजह से रुपया 85 के बैरियर को तोड़ते हुए 84.75 के स्ट्रांग पॉजिशन पर भी पहुंच सकता है. वास्तव में करेंसी मार्केट की नजरें इस समय अगले की मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग, 2 अप्रैल को लागू होने वाला रेसीप्रोकल टैरिफ, महंगाई के आंकड़े और विदेशी निवेशकों के निवेश का फ्लो पर नजरें टिकी होंगी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर मंगलवार को करेंसी मार्केट के बंद होने के बाद किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

बुधवार को आई रुपए में मजबूती

बुधवार को रुपया अपनी शुरुआती गिरावट से उबरकर 3 पैसे बढ़कर 85.69 (अनंतिम) प्रति डॉलर पर बंद हुआ. विदेशी निवेशकों के निवेश की वजह से रुपए में तेजी देखने को मिली है. फॉरेन करेंसी डीलर्स ने कहा कि कैश की कमी, पारस्परिक टैरिफ की चिंताओं और आयातकों की ओर से महीने के अंत में अमेरिकी करेंसी की डिमांड के कारण रुपया नए सिरे से दबाव का सामना कर रहा है. इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया 85.71 पर खुला और फिर कारोबार के दौरान 85.68 के उच्चतम स्तर और 85.98 के निम्नतम स्तर को छुआ. डॉलर के मुकाबले रुपया सत्र के अंत में 85.69 (अनंतिम) पर बंद हुआ, जो पिछले क्लोजिंग लेवल से 3 पैसे मजबूती को दिखाता है. मंगलवार को रुपया अपनी सात सत्रों की तेजी पर विराम लगाते हुए 11 पैसे की गिरावट के साथ 85.72 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

इस वजह से रुपया हुआ मजबूत

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा कि मंगलवार को थोड़े समय के ठहराव के बाद भारतीय रुपए में मजबूती आई, जिसका कारण विदेशी निवेश का फिर से बढ़ना था. इसके अलावा, विदेशी बैंकों और निर्यातकों ने बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि, परमार ने कहा कि वित्त वर्ष के अंत से पहले बाजार सहभागियों द्वारा आवश्यक समायोजन किए जाने के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहा. उन्होंने कहा कि आगे की ओर देखते हुए, यूएसडी-आईएनआर स्पॉट को 85.40 के स्तर के आसपास समर्थन मिलने की संभावना है, जबकि 86.25 के आसपास प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है.

जियो पॉलिटिकल टेंशन का असर

फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स ने कहा कि जियो पॉलिटिकल रिस्क जैसे गाजा में इजरायल के हमले से लेकर ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों पर अमेरिकी हवाई हमलों तक – अमेरिकी डॉलर जैसे सेफ हैवन असेट्स की डिमांड में इजाफा कर रहे हैं. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है. उन्होंने कहा कि इससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आया है.

डॉलर इंडेक्स में तेजी

डॉलर इंडेक्स 0.03 फीसदी बढ़कर 104.21 पर कारोबार कर रहा था. ब्रेंट क्रूड ऑयल 0.63 प्रतिशत बढ़कर 73.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. घरेलू इक्विटी बाजार में, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 728.69 अंक या 0.93 प्रतिशत गिरकर 77,288.50 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 181.80 अंक या 0.77 प्रतिशत गिरकर 23,486.85 अंक पर बंद हुआ. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को शुद्ध आधार पर 5,371.57 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे.

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